जीन पियाजे की संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत
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📅 2/20/2026
परिचय और अवलोकन
जीन पियाजे (1896-1980) एक स्विस मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने बच्चों के संज्ञानात्मक विकास का अध्ययन किया
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संज्ञानात्मक विकास के चरण
- संवेदी-गतिक चरण (0-2 वर्ष): शिशु इंद्रियों और गतिविधियों के माध्यम से दुनिया को समझते हैं
- पूर्व-संक्रियात्मक चरण (2-7 वर्ष): बच्चे प्रतीकात्मक सोच विकसित करते हैं लेकिन तर्क करने में कठिनाई होती है
- मूर्त संक्रियात्मक चरण (7-11 वर्ष): बच्चे तार्किक रूप से सोचना शुरू करते हैं लेकिन केवल मूर्त चीजों के बारे में
- औपचारिक संक्रियात्मक चरण (11+ वर्ष): किशोर अमूर्त और काल्पनिक अवधारणाओं के बारे में सोच सकते हैं
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निष्कर्ष और महत्व
- पियाजे का सिद्धांत शिक्षा प्रणालियों को प्रभावित करता है और बाल-केंद्रित शिक्षण दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है
- यह सिद्धांत बताता है कि बच्चे वयस्कों की तरह नहीं सोचते - उनकी सोच गुणात्मक रूप से भिन्न होती है
- शिक्षकों को बच्चों के विकास के चरणों के अनुसार शिक्षण विधियों को अनुकूलित करना चाहिए
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